| عـمرويه - سال 1314 | |
| ديــن اســلام از او گــشــت مــسـلــم بــقـرار | اي کـسـوني که اگـويـن شـيخ عـمـر خـدمت کـرد |
| تـا بـبـد جـنـسـي شـيـخـت بکـني خوت اقـرار | داسـتـونــي موز تـاريـخ اگــمـت گــوش بــگـــر |
| خــواسـت از مـذهـب اسـلام بـره تـار و تـتـار | بــو مــعـاويــه کــر حــرب ابــوسـفــيـان بــيـــد |
| حـضـرت خــيــر بـشــر بـيـد و تـمام انصــار | بـســر احــمــد مـرسـل قــشـن از کـيـنه کـشـيـد |
| خاک و گل پاک اکـشـيدن هـمه با کول و کنار | کــل اصـحـاب بـزحـمـت هـمـه خــنــدق کـنـدن |
| مـات و ابـيـن هـمه خـلق از او اسب و سـوار | عـمـرو از کـيـنـه و لـج اسـبـه ز خـنـدق پـرنيـد |
| يـا محمد په چته؟ سي چه نـشستي به حصار؟ | ز غـروري کـه بـسـر داشت ز دل نـعـره کـشيد |
| روز بـايـد کـه بـچـشـمـت بـکـنـم چي شـو تار | مـو اويـدم کـه ز خـنـدق بـکـشـم تـون صـحـرا |
| مـونـه اگـون عـمـرو کـر عـبـدود ريـشـه درار | ريـشـه و بـيـخ تـنـه وامـو ز دنــيــا بــکــــنـــم |
| بـه جـلات تـش نـزنــم يـا نـکـنــم حـونـته بـار | عـبـدود بـوم خـبــر از مــو نــداره ار اخــــوم |
| هـر چه داري هش و هش پاک نبرم باخرو بار | سـرره جـسـتـنـمه ارکـه قــرون تـــون نــدرم |
| کـه يکـيتون بـروين و بـکـشيـن ئي سگ هـار | حـضـرت خـتـم رسل بـانگ بـاصحاب کـشـيـد |
| کـه جـواب هــيـچ نــدادن بـرســول مــختـتــار | جـو نو از ترس هـمه رنگ زريـسون پـرست |
| گـد گـگـويـل يـونـه چـي شيـرومنم شير شکار | ز ســر قــهــر ورســتــار بــپــا شــيــر خــدا |
| احـمــد ار اذن بــده مــوابـــرم از يــو دمــــار | بـا حضـور هـمه اصحاب عـلي عـرض بکرد |
| جـنـگ بـا فـيـل خـدا نـه تـو چونو خوار مـدار | حـضـرت خـتـم رسـل گـد بـجـوا بـس بـنـشين |
| قـزقـزي کــم بـکـن و رو بـنـشـيـن کـار مــدار | يــا عــلـي مـر تــو نـدونــي يـو کـــر عـبـدود |
| ز سـر قـهـر گـزيـد لـونـه و رهـدي بـکـنــــار | وقـتـي فـهـمـيـد عـلـي مـيـل پـيـامـبـر نـي دي |
| کـه وريـسـتـيـن گ گـويل بـرويـن پـاک بفرار | حـرف بـيـموقـع عـمر زيـد کـه معـناس يوبـيد |
| گـد يکــي قـصه مـودونـم ز هـمـي لکـه چـنـار | سـر جـــرنـيــد طــرف عـمرو بـآواز بـلـنـــد |
| مـنه يـک قـافـله سـنـگـيـنـي ارهـديـم شـوتــار | عـمـرو بـيـد و مـو کـر تـاتـم و تـاتـم هــشـام |
| ار هـمـه چـهـار نــفــر بـيـن زيـادتـر ز هـزار | يـه دفـه بـي حـوري دز سـر رهـمـونـه گرد |
| چـشـم تـازيـن بـيـک از هـمـه سـو بـرد دمـار | عـمرو ور دست گرد کره شـتـر کـرد درک |
| گـد کـه فـاروق خرفـتي وني يـاي هـيـچ بــکار | احمد از حرف عمرو اخمه کشيد ورمنه يک |
| سي چه ئي قـدر ازني ئي هـمـه بي پي بگـدار | حـرف بـيـوره مــزن کــردل ارديــتــه نــبـر |
| چـنـد سـنـگـيـن اکـنـي بـار خـوتـه روز شـمـار | بــزبـونـت بـزنـه مـارکـه کــرکــر نــکـــني |
| يـا مـحـمـد بـفـرسـتـي تـو ز اصحـاب کـبـــار | بـاز عـمرو از تـه دل نـعـره و فـريـاد کـشيد |
| يـا فرسـتم بـبـهـشـت پـاک مـو يـو نـونه بـقطار | گـد بـه طـعـنـه : مـو اويـمـه بجـهـنم بـرووم |
| بـاز فـرمـود : عـلـي رو بـنـشـيـن عـذر مـيـــار | باز عـلي عرض بکرد بس که اجازه بده بـم |
| کــه هــمــي تــازه زپــاتـون ادرارم شــــولار | باز عـمرو از ته دل بـانگ بـاصحاب کشـيـد |
| آبـرو سـو بـورم ور مـنـه هـر شـهـر و ديــــار | يـک کـلـه کـاغـذيـه ور سـر شـيـخـيـن بـنم |
| دم خـريـس وا بـکـنـم ور مـنـه ئـي ايـل و تـبار | عـمـر وا بـگـــرم ريـشـسـه از تــه بـبــرم |
| بـکـنـيـزم نـگــدم در وره روشــونــه بــيـــــار | سـيل ور آيــنـه بـکـردم و نـتـاشـيـم ريـشم |
| لاش اصحـاب بـسـوزنـم هـمه با هـيـمـه و خـار | نـذر کـردم خـومـه تـک تـش بـمديـنـه بزنم |
| ئـي قـدر خـفـت و خــواري بـســر خـلــق نـيار | دفـه سـوم کـه عـلـي گـد بـمـحـمـد کـه: بسه |
| کـه اجـازه بــدهــي بــم بـحـق هــشــت و چهـار | الـتـــمــاســت اکــنــم تــا ســر پـــات بوسم |
| يـو هم او شخص که از ترس مـو رهـدي بـفرار | جـنـگ بـدره تـو فـرامـوش مکـن مر نيدي |
| تـو بـرو تـا مـو بـبـيـنـم چـه ابـو آخـــر کـــــار | گد محمد بـعـلي : دسـت خـدا پـشت و پنات |
| مـثـل شـيـري کـه بـبـيـنـه بـدم ريـس شـکـــــــار | شادمون شيـر خدا هد طرف عمرو چو برق |
| گـد: تـو ور گـرد بـروجـون خـتـه مـفـت مـــدار | عـمـرو ديـدي چـو عـليـنـه هـو بآواز بـلـند |
| تـو بـرو تـا کـه بـيـاهـن هـمـه اصـحـاب کـبــــار | دوسـتـي مـو و بـوتـه تـو فـرامـوش مـکـن |
| شـيـر ديـده کـه چـونـه دک ازنـه مـثـل شـکـــار | کـر عـفان پـدر سک کجـنه سي چه ني يا |
| نصـف شو نـيـد کـه گروسي و بـري ورته غـار | بـابـوبـکـر بـگـو چـنـد زني حـيـله و شـنـد |
| اگـوهـي دالـــو پـيـره کـه کـنــه شـــيــر نـکــار | بوس او پـيـر دوروگو به مـنه مال خمون |
| ئـي چـودي حـيـله و شـنـد تـونـي يـا هـيـچ بـکـار | کجه پس رهده عمر بس بگـواي بخت بووت |
| کـربـي دا اخـوهـــه تـا نــکــنـه از مـــو فــرار | دي بـه تـسبـيح و دعايـنـد و به ورد منه لـو |
| که چو نـو گـپ ازني ئي هـمـه با فـيـس و وقار | گـد عـلي : احـمـد و اصـحـاب کـنيزا داتن |
| کـه گـودي تـش ازنـم بـس هـمـه با هـيمه و خار | اگـوهـم شـهـر مـديـنـه بـه تـيـول بـوتــــه |
| کـه ز شـمـشـيـر مـو لـرزنـده ابـولـيـل و نـهــار | مـر نـدونـي چـو مني خـدمت احـمد اکـنه |
| کـه مـنـه جـنـگ ز دشـمـن نـکـنـه هـيــچ فـرار | مـن اگـون حـيـدر کـرار کـه معـنيس يونه |
| تـا تـه زو نــتـه گـرهــدم و کـــشـــيــدم بـمـهار | دوش بـيدي که مـنه بـدر مو غـوغا کردم |
| اشـکـمـاسـونـه مـو شـرنـيـم زيـک چـي چـلوار | عـنبه و شيـبه و او هـنظـله مرياد بو رهـد |
| ابـرم از تـو و اصـحـاب هـمـه نـــســـل و نــتـار | اگـو هـم مـر تـو نـدونـي مـو تـلافي اکنم |
| بـه دورو بـسـکـه گـديـن روز قـيـامـا و شـمــار | آخرس جنگ قريشه تو و مـحمد و ندين |
| يـه کـتـابـي بـنـويـس کـه ني يـا هـيـچ بـکــــــار | چندترين فنـق درارين زختون هي شووروز |
| چـنـد تـري قـصه بـياري تـو ز پــيــر اروز پـار | گدعلي بس که: بسه بخت بووت حرف نزن |
| گـد عـلي: مـطـلبـيه صـبـر بـکـن دسـت بــــدار | عمرو شمشير کشيد خواست بجمنه بعلي |
| ز سـه خـواهـش ز يکـيسـون مـو نـدارم انکـار | گدعلي بس: موشنيدم تو گدي ورمنه جنگ |
| ز سـه خـواهـش بـه يـکـيـســون انـماهـم اقـرار | عمرو گد: دشمن موارکه سه خواهش بکنه |
| مـو قـــبــولـــس اکــنــم ارچــه بـبـيـنـم دشــوار | حال اير ميل تو وابيده که خواهش بکني |
| ديـن اسلام قـبــول کـن، بـت بـهـلي بــــکــنــار | گدعلي بس: توبي يوحرف مونه گوش بگير |
| تـو زئـي حـرف گـذر کـن سـخـني تـازه بـيـــار | گـد که: از دين باوام بخت بووم نيگذرم |
| جنگ مـکـن واس بـرو حـرف مـزن کار مـدار | گـد: حـالا که نـيـاهـي تـو بـه ديـن احـمـد |
| کـــل و گــالــه ز پـي اسـب اکــردن بــســيــار | گـد: يـا بومه چـو پـرنـيم ز خـندق زنـگل |
| حـرف زنـگـل چـکـنـم کـه اگـوهـن کـرد فــرار | مو خجالت اکـشـم ارکه به خوم ورگردم |
| چـونـکـه نـاجـور ابـوهـه جـنـگ پـيـاده و سـوار | گـد حـالا کـه چونونه پـه درآ از يــابــو |
| کـه بـجـمـسـت زمـيـن گـشـت هـوا تـيـره و تـار | عمرواسب خونه پي کرد وزدل نعره کشيد |
| تـا نـگـون بـرد عـلي حـيـلـه و تـزويـر بـکــــار | گد علي بـس که تو واضـربت اول بزني |
| زدل حــضــرت جـبـريــل امـيـن رهــد قـــرار | دست عمرو رهد بهوا خواست بجمنه بعلي |
| قـسـمي داد خـــدانــه بـحــق هــشــت و چــهـار | سرپتي احمد مرسل و دو دستـش بهـوا |
| ريـن ومـيـن هـمـه پــاي کــنــد حـوا بـا دل زار | تا ته پـير" آدم " بـيچاره ز زوني رهـدي |
| مـثــل بـارون بـهـار اشــک ارهــدن بــکـــنــار | کل اصحاب اني يشتن همه با گردن کج |
| کــه خـدايــا تــو عــلــيـنـه بـــســـلامــت وادار | روح موسي ز کل عرش اچرنيد بخـدا |
| درک و خــود سـه شـرنـيـد زيـک مـثـل خـيـار | به منه ئي هو و جنجال هو جمنيد علي |
| ارکـه اکـشـت عـلـي، کـار تـمـام بـيـد و تـيــار | يـه عـلف داغ نهادي به منه فرق سرس |
| پـاک مـلائـک پـي نـظـاره کـشين صف بـقطار | وقت تکبـير علي گد و کـشيدي شمشير |
| انجـم و چـرخ بريـن پـاي هـمه رهـدن زمـدار | آسمونا و زمين درهـم و برهـم وابـيــد |
| يـونه اگـون برق که افـتو زورس کــرد فـرار | بـرق شمشير عـلي زيد منه عرش خدا |
| نـوبـت اونه کـه بايـد کـنه زي مرحـلــه بـــار | عمرو فهـميد که ديه غافلهً مرگ رسيد |
| رونسه و بـيـرقـسـه ونـد بـه لـم چـي لـک دار | خواست تا جم بخوره شيرخدا جمنيد بس |
| بـــســـرادار جـهــنـم کــه کـلـيـتــانــه بـيــــار | تا علي شوند به عمرومالک دوزخ چرنيد |
| گد که بوس او چونه گدرو جل و بنداسه درار | گـد مـنه غـرفه تهي جاسه معـين بکنين |
| که ورستاد ز زمـين خـرمـني از گـرد و غبار | عمرو رهـمست زپامر اگدي که رمست |
| مـثـل شــاهــي که سـر تـخـت نـشـيـنه بـقـرار | به منه گرد علي رهـد سرسينه س بنشست |
| آفـرين بـاد بـديـن سـلـطـنت و شـاًن و وقـــار | ز مـنـه چرخ بـرين يک مـلـکي داد نـدا |
| وقـتي کـشـتــيــم زره مـه تـو زلاشــم نــدرار | عمرو چرنيد بعلي: اي مو بقربون سرت |
| نـيـد محـتـاج بـه ئـي آهـن بـي رنـگ و نگـار | گد علي بس که: کري شاد بميري که علي |
| گـوش تـا گـوش سـر عـمـرو بـريـد رستم وار | دشـنـنه شـيـر خـدا از کل شالس درورد |
| اخـرامـيـد بصـد جـلـوه چـي طــاووس بـهـــار | سرخـيـن آلي عـمرو به منه دست گـرد |
| کـرد تـعـظـيـم و بــپــاهـاس سـر کــرد نــثــار | بـهـمين حال اويد تا که رسـيـد بـرسـول |
| کـه صـداسون زبـرافـتـو ارسـيـد تا بـه نصار | کـل اصحاب وا با يک هـمه تکـبير گدن |
| ز صـداگالـه و کـل هـيـچ نه حـد بـيد نه شمار | مـخـتصـر قـشـقره وابـيـد منه مال عرب |
| ريـسـه بوسـيد و بخنـديـد و نـشـوندس بـکـنار | حضـرت خـتـم رسل دست علينه بگــرد |
| گـد بــا حـمــد کــه سـلامـت ارسـونـه سـتـار | جـبرئيل از طرف حق بسه گم ويد به لم |
| مـذهـب ديـن تـو وابــيــد مــســلــم بـــقـــرار | حق افرمائه که از ضربت شمشير عـلي |
| پـي شـاًنــش بــه دم عــــرش بــزيـدم وردار | نومسه با قـلم سوز نوشـتـم کـل عــرش |
| اخـتـيار شـو و روز کـه اگـون لـيل و نـهـــار | کوثر و حوض بـهـشته به تـيولس دادم |
| نصـف شـال خـومه دامـس که کنه زس دستار | پاک ملائک همه نه حلقه بگوشس کردم |
| نـيـفـروشـم مـو يـه مـيـسه بـهـمه ايل و تـبــار | بـــخــدائي خـودم قـدر عـلـيـنـه دونــــم |
| افسـر ار مـدح عـليـنه بـکـنـه حــق داره | |
| چون ني ياهه چو علي دي بجهان شاه سوار | |